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कोंडागांव में सूरजमुखी की खेती से किसानों की तकदीर बदली: 250 किसानों ने 200 एकड़ में लगाई फसल, प्रति एकड़ 20 हजार की अतिरिक्त कमाई

  कोंडागांव में सूरजमुखी की खेती से किसानों की तकदीर बदली: 250 किसानों ने 200 एकड़ में लगाई फसल, प्रति एकड़ 20 हजार की अतिरिक्त कमाई: कोंडाग...

 कोंडागांव में सूरजमुखी की खेती से किसानों की तकदीर बदली: 250 किसानों ने 200 एकड़ में लगाई फसल, प्रति एकड़ 20 हजार की अतिरिक्त कमाई:

कोंडागांव: जिले में सूरजमुखी की खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिले के 8 गांवों में प्रदान संस्था की पहल पर 250 किसानों ने मिलकर 200 एकड़ भूमि में सूरजमुखी की खेती शुरू की है, जिससे उन्हें पारंपरिक फसलों के मुकाबले प्रति एकड़ 20 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है।

नई उम्मीदों की किरण बनी सूरजमुखी की खेती:

कोंडागांव जिले में आमतौर पर धान और दलहन की खेती पर ही किसानों की निर्भरता रही है, लेकिन अब सूरजमुखी की फसल एक नई संभावना बनकर उभरी है। प्रदान संस्था ने किसानों को सूरजमुखी की खेती के लिए प्रशिक्षित किया और उच्च गुणवत्ता वाले बीज एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया।


कम लागत, अधिक मुनाफा:

सूरजमुखी की खेती में पानी और खाद की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा हो रहा है। एक एकड़ में सूरजमुखी की फसल तैयार करने में लगभग 8-10 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलने से किसानों को प्रति एकड़ 30-35 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है।


किसानों की प्रतिक्रियाएं:

सूरजमुखी की खेती करने वाले एक किसान रमेश यादव का कहना है, "धान की फसल में अधिक पानी और देखभाल की जरूरत होती है, जबकि सूरजमुखी कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में भी अच्छा दाम मिल रहा है। इससे हमारी आमदनी बढ़ी है और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।"

वहीं, गीता देवी, जो पहली बार सूरजमुखी की खेती कर रही हैं, बताती हैं, "पहले हमें यह समझ नहीं था कि सूरजमुखी से भी अच्छा मुनाफा हो सकता है, लेकिन अब हमें इस फसल से अच्छी आय हो रही है। भविष्य में इसे और बड़े पैमाने पर उगाने का विचार है।"


बाजार में बढ़ी मांग:

सूरजमुखी के तेल की बाजार में बढ़ती मांग के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी नहीं हो रही। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बाहरी व्यापारियों द्वारा भी सीधे किसानों से सूरजमुखी की खरीद की जा रही है, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिल रहा है।


सरकार और संस्थाओं की भूमिका:

प्रदान संस्था के मार्गदर्शन में यह पहल सफल रही है, और अब सरकार भी इस दिशा में किसानों को सहयोग देने के लिए नई योजनाएं बना रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगर इसी तरह किसानों को प्रशिक्षण और समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में कोंडागांव जिले में सूरजमुखी की खेती और अधिक लोकप्रिय हो सकती है।


निष्कर्ष:

कोंडागांव में सूरजमुखी की खेती किसानों के लिए नई आशा बनकर आई है। कम लागत, अधिक मुनाफा और बाजार में बढ़ती मांग के चलते यह खेती पारंपरिक फसलों का एक बेहतर विकल्प बनती जा रही है। अगर यह पहल इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

यह समाचार लेख तैयार है। यदि आप इसमें कोई बदलाव या अतिरिक्त जानकारी जोड़ना चाहते हैं, तो बताएं!


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